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वात्‍सल्‍य निर्झर - कविता - अविनाश वाचस्‍पति

आपका प्रकाश एन जी ओ का प्रतीक चिन्‍ह
#‪#‎वात्‬‍सल्‍यनिर्झर
वायु चिकित्‍सा
एयर सर्जरी
संभव है
मेधा से
किए जाते हैं
सभी चमत्‍कार
समझते हैं हम
चमत्‍कार
पर न उसमें
चमक होती है
पर न होती है
उसमें कार
की चमकार
कार के मायने
जो समझते हैं
चौपहिया वाहन
पर करते हैं सवारी
जबकि कार का
जीवन कार्य
कारण या कारक
हाेना है
कारक वो जो सदा
सच्‍चे मन से किया जाए
सद्गुणों का अंबार लगाएं
अंबार लगाना
व्‍यापार सजाना
नोट कमाना
अपने उचित रूप में
सही कहलाता है
कारनामा
वही तो है
वात्‍सल्‍य निर्झर
जो पल पल झरता रहे
पुष्‍पों की तरह
महकता रहे
खुशबू की तरह
उड़ता रहे तितली की तरह
न कि पतझड़ की तरह
जबकि पतझड़ में
पत्‍तों का टूटकर
जमीन पर गिरना
नीचे सूखी-हरी घास पर
भी सकारात्‍मक है
पर काकरोचों की
किलमिलाहट चीख पुकार
गूंज में कैसे करोगे
सकारात्‍मकता का आवाह्न।
--- अविनाश वाचस्‍पति
9560981946
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