आप किसे भ्रष्टाचार मानते हैं दूसरों की नहीं
सिर्फ दीजिए अपनी राय
हो सकता है
एक की नज़र में भ्रष्टाचार है जो
वो दूसरे की नज़र में हो शिष्टाचार
जैसे सबका नज़रिया अलग
वैसे ही होती है राय अलग
इस अलग-अलग को करते हैं इकट्ठा
नहीं कर रहा हूं हंसी-ठठ्ठा
कोई उठापटक नहीं
नहीं कोई मिलीभगत
जब पहचान जाएंगे
तभी बना पाएंगे उसकी गत
जो कहलाएगी दुर्गत
इसलिए पहले पहचान तो लें
भ्रष्टाचार के व्यापक संसार को जान तो लें
जान लेंगे, तभी तो उसकी जान लेंगे
फिर भी पता नहीं वो देगा जान
या बचाकर भाग ले अपनी जान
मैं यह भी जानना चाहता हूं
बतलाइये जी विनीत निवेदन है


