हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने के संकल्प के साथ मॉरीशस में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव संपन्न



 वाएं से विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र, मॉरीशस के सांसद श्री विकास ओरी, भारतीय उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर, हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के प्रधान श्री यन्तु देव बुद्धू, मंत्री श्री धनराज शंभू और सभा को संबोधित करते परिकल्पना समय के प्रधान संपादक श्री रवीन्द्र प्रभात।
पोर्ट लुई: परिकल्पना लखनऊ, भारतीय उच्चायोग मॉरीशस और हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के संयुक्त तत्वावधान में 2 सितंबर से 8 सितंबर तक मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में आयोजित दसवां अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में लखनऊ की नौ विभूतियों सहित उत्तर प्रदेश से कुल 19 विभूतियाँ शामिल हुईं। इसके अलावा भारत के विभिन्न प्रदेशों से तथा मॉरीशस से शताधिक हिन्दी विद्वान, साहित्यकार, टेक्नोक्रेट, ब्लोगर्स तथा संस्कृतिकर्मियों ने हिस्सा लिया। इस उत्सव में भारत तथा मॉरीशस के लगभग 42 हिन्दी सेवियों को सम्मानित किया गया तथा एक दर्जन पुस्तकों का लोकार्पण हुआ। इसके साथ ही हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य पर भारत और मॉरीशस के विद्वानों ने चर्चा की। साथ ही मुंबई के सागर त्रिपाठी, मॉरीशस के डॉ. हेमराज सुंदर, लखनऊ की डॉ. मिथिलेश दीक्षित तथा अमेठी के जगदीश पीयूष की अध्यक्षता में चार काव्य संध्याएँ सम्पन्न हुईं। 


परिकल्पना समय मासिक के प्रधान संपादक लखनऊ निवासी रवीन्द्र प्रभात ने बताया कि इस उत्सव में लखनऊ से अवधी की लोकगायिका कुसुम वर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मिथिलेश दीक्षित, शिक्षाविद डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, साहित्यकार व समाजसेवी सत्या सिंह 'हुमैन', हिन्दी विकिपीडिया की प्रबन्धक माला चौबे, नाट्यकर्मी राजीवा प्रकाश, संस्कृतिकर्मी आभा प्रकाश, परिकल्पना के कोषाध्यक्ष शुभ चतुर्वेदी 'शुभेन्दु' सम्मिलित हुये। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से साहित्यकार व शिक्षाविद डॉ. मीनाक्षी सक्सेना 'कहकशाँ' और डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, इलाहाबाद से नाट्यकर्मी डॉ. प्रतिमा वर्मा व मास्टर अर्णव वर्मा, सुल्तानपुर से वरिष्ठ अवधी साहित्यकार डॉ. राम बहादुर मिश्र, आद्या प्रसाद सिंह प्रदीप और डॉ. ओंकार नाथ द्विवेदी, कानपुर से डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल अमिय अमेठी से जगदीश पीयूष वाराणसी से दीनानाथ द्विवेदी रंग, सचीन्द्र नाथ मिश्र और अभिलेश वर्मा देवरिया से पुरातत्वविद डॉ. रमाकांत कुशवाहा गोंडा से शिव पूजन शुक्ल और आगरा से डॉ. सुषमा सिंह, डॉ पूनम तिवारी, डॉ प्रभा गुप्ता और डॉ रमेश सिंह धाकरे आदि ने अपनी उपस्थिती दर्ज कराई। वहीं उत्तराखंड से बिमल बहुगुणा और मुंबई से सागर त्रिपाठी की भी सार्थक उपस्थिति रही। 


सभी परिचर्चा सत्र और काव्य संध्याओं का आयोजन मॉरीशस के ली ग्राँ ब्ले सभागार में तथा मुख्य कार्यक्रम हिन्दी भवन लॉन्ग माउंटेन में आयोजित हुये। इस कार्यक्रम में मॉरीशस सरकार में मंत्री विकास ओरी, मॉरीशस के भारतीय उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर, विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस के जेनरल सेक्रेटरी प्रो. विनोद कुमार मिश्र, हिन्दी प्रचारिणी सभा के प्रधान यन्तु देव बुद्धू, मंत्री धनराज शंभू और रवीन्द्र प्रभात मंचासीन थे। इस अवसर पर लखनऊ की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मिथिलेश दीक्षित और इलाहाबाद की डॉ प्रतिमा वर्मा को ग्यारह हजार रुपये, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह के अंतरराष्ट्रीय शीर्ष उत्सव सम्मान प्रदान किया गया। वहीं मॉरीशस के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ राम देव धुरंधर को ग्यारह हजार रुपये का परिकल्पना शीर्ष कथा सम्मान, पाँच हजार रुपये का परिकल्पना साहित्यभूषण सम्मान तथा दो हजार पाँच सौ रुपये का परिकल्पना भाषा सम्मान और परिकल्पना साहित्य सम्मान क्रमश: मॉरीशस के साहित्यकार यंतू देव बुद्धू और धनराज शंभू को प्रदान किया गया। 


इसके अलावा मॉरीशस के साहित्यकार सूर्यदेव सुबोरत, हनुमान दुबे गिरधारी, कल्पना लालजी, इंद्रदेव भोला इन्द्रनाथ, टहल रामदीन और परमेश्वर बिहारी को क्रमश: परिकल्पना हिन्दी सम्मान, परिकल्पना सृजन सम्मान, परिकल्पना काव्य सम्मान, परिकल्पना संस्कृति सम्मान, परिकल्पना प्रखर सम्मान और परिकल्पना प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया। 

इस अवसर पर भारत के लगभग 30 साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, ब्लॉगरों तथा नाट्यकर्मियों क्रमश: जगदीश पीयूष, डॉ. राम बहादुर मिश्र, डॉ. अर्चना श्रीवास्तव, कुसुम वर्मा, सागर त्रिपाठी, दीनानाथ द्विवेदी ‘‘रंग‘‘, सत्या सिंह ‘‘हुमैन‘‘, डॉ. सुषमा सिंह, डॉ॰ अर्चना श्रीवास्तव, राजेश कुमारी ‘‘राज‘‘, डॉ. मीनाक्षी सक्सेना ‘‘कहकशां‘‘, डॉ.रमाकांत कुशवाहा ‘‘कुशाग्र‘‘, डॉ. प्रभा गुप्ता, डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ. पूनम तिवारी, अदया प्रसाद सिंह ‘‘प्रदीप‘‘, शिवपूजन शुक्ल, डॉ. ओम प्रकाश शुक्ल ‘‘अमिय‘‘, विमल प्रसाद बहुगुणा, सचिंद्रनाथ मिश्र, अभिलेश वर्मा, शुभ चतुर्वेदी, अर्णव वर्मा, डॉ. अरुण कुमार शास्त्री, माला चौबे आदि को अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव सम्मान प्रदान किया गया। 

इस अवसर पर परिकल्पना समय का सितंबर 2018 अंक का लोकार्पण हुआ जो मॉरीशस में हिन्दी भाषा और संस्कृति के विकास और विस्तार पर केन्द्रित है। इसके प्रधान संपादक हैं रवीन्द्र प्रभात तथा इस अंक के अतिथि संपादक हैं डॉ. राम बहादुर मिश्र। इसके अलावा त्रैमासिक पत्रिका ‘‘प्रस्ताव‘‘ के हाइकू विशेषांक जिसकी अतिथि संपादक हैं डॉ. मिथिलेश दीक्षित, रवीन्द्र प्रभात का चैथा उपन्यास लखनऊवा कक्का, डॉ. मीनाक्षी सक्सेना ‘‘कहकशा‘‘ की कविताओं का संग्रह एहसास के जूगनू, डॉ मिथिलेश दीक्षित एवं रवीन्द्र प्रभात की संपादित पुस्तक हिन्दी के विविध आयाम,  डॉ रमाकांत कुशवाहा कुशाग्रकी कविताओं का संग्रह ढूँढे किसको बंजारा,  श्री अद्या प्रसाद सिंह प्रदीप का खंडकाव्य ‘‘तुलसीदास‘‘, अभिदेशक त्रैमासिक पत्रिका जिसके संपादक हैं डॉ. ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ मिथिलेश दीक्षित की पुस्तक हिन्दी हाईकू संदर्भ और विमर्श, सागर त्रिपाठी का काव्य संग्रह शब्दबेध के साथ-साथ हिन्दी प्रचारिणी सभा की हस्तलिखित पत्रिका दूरगा का मुद्रित अंक, डॉ हेमरज सुंदर और राज हीरामन की पुस्तकों के साथ मॉरीशस के लगभग आधा दर्जन साहित्यकारों को पुस्तकों का भी लोकार्पण संपन्न हुआ। साथ ही इस अवसर पर श्रीमती कुसुम वर्मा के रेखाचित्र और पेंटिंग्स, आभा प्रकाश की एम्ब्राइडरी तथा डॉ. अर्चना श्रीवास्तव के विचारों पर आधारित कला वीथिका की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहा। 


इसमें चार परिचर्चा सत्र थे, प्रथम परिचर्चा सत्र का विषय था  ‘‘हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका‘‘, द्वितीय परिचर्चा सत्र का विषय था ‘‘हिन्दी के वैश्विक प्रसार में महिलाओं की भूमिका‘‘, तृतीय परिचर्चा सत्र का विषय था ‘‘मॉरीशस में अवधी तथा भोजपुरी बोलियों के प्रभाव में कमी‘‘ तथा चतुर्थ सत्र था ‘‘हिन्दी में हाइकु की दिशा और दृष्टि‘‘  

प्रसिद्ध रंगकर्मी, टेली धारावाहिक एवं हिन्दी फिल्म अभिनेत्री डॉ. प्रतिमा वर्मा की नाट्य प्रस्तुति ‘‘अकेलापन‘‘ तथा हॉलीवूड, वॉलीवूड और उत्तरांचली फिल्मों के अभिनेता श्री बिमल बहुगुणा द्वारा पंडवानी की तरह उत्तरांचली काव्य कवितावली की प्रस्तुति भावभंगिमा के साथ की गयी। संयुक्त परिवार पर आधारित राजीवा प्रकाश और कुसुम वर्मा की नाट्य प्रस्तुति दर्शकों को भाव विभोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही इस अवसर पर कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया है, जिसमें मॉरीशस और भारत के लगभग दो दर्जन कवियों ने भाग लिया।


सभा के मुख्य अतिथि मॉरीशस के सांसद व पीपीएस मंत्री श्री विकास ओरी ने रामचरित मानस और हिन्दी की महत्ता को प्रतिपादित करते हुये कहा कि "रामायण और हिन्दी के बिना मॉरीशस अधूरा है।"

सभा को संबोधित करते हुये मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त श्री अभय ठाकुर ने कहा कि "हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु हम प्रयासरत हैं। यह कार्य तभी संभव होगा जब सभी देश अपनी ओर से सहयोग राशि दें जो कठिन तो है, किन्तु असंभव भी नहीं है। हम इसी लक्ष्य कि ओर बढ़ रहे हैं। कुछ अड़चने हैं जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।"


विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव प्रो विनोद कुमार मिश्र ने मॉरीशस में स्थापित विश्व हिन्दी सचिवालय की गतिविधियों का उल्लेख करते हुये अपने संबोधन में कहा कि "भविष्य में हिन्दी सेवी संस्थाओं के सहयोग से हम विश्व स्तर पर इस प्रकार के आयोजनों की शृंखला आयोजित करेंगे। इस पर काम चल रहा है और निकट भविष्य में क्रियान्वित होने की संभावना है। 

इस अवसर पर हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के प्रधान यन्तु देव बुद्धू ने हिन्दी प्रचारिणी सभा को हिन्दी सेवियों का तीर्थस्थल बताते हुये सभा की उपलब्धियों को रेखांकित किया और आगत अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि "यह हमारा सौभाग्य है कि हम आज इस कार्यक्रम के माध्यम से हिन्दी को वैश्विक फ़लक पर प्रतिष्ठापित करने हेतु एक संकल्पित प्रयास कर रहे हैं।" 

प्रतिनिधि मण्डल के नेतृत्वकर्ता और परिकल्पना के सस्थापक रवीन्द्र प्रभात ने कहा कि "हिन्दी की पढ़ाई आज विश्व के 130 विश्वविद्यालयों में होती है, किन्तु इस देश में मुझे एक अभाव खटक रहा है कि यहाँ राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी का कोई दैनिक अखबार नहीं है। यदि ऐसा हो जाये तो हम हिन्दी को जन जन तक ले जाने में सफल हो सकते हैं। इससे हमारी नयी पीढ़ी को भी अपनी भाषा और संस्कृति आत्मसात करने में सुविधा होगी।" 

वैश्विक संदर्भ में हिन्दी विषय पर आयोजित विचार सभा में अपना अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुये डॉ राम देव धुरंधर ने कहा कि "साहित्य की ऐसी कोई भी रचना नहीं होनी चाहिए जो दुनिया को बांटे, मानवता को बांटे। सद्भावना, प्रेम और मानवता का स्वर ही साहित्य की भाषा का लक्ष्य होना चाहिए।
हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के मंत्री धनराज शंभू ने कहा कि "वैश्विक हिन्दी साहित्य में विश्व मानवता की परिकल्पना है, जिसे विदेशी विद्वानों ने भी अपनाया है। हिन्दी दुनिया के पाँच महाद्वीपों में व्याप्त है, जिसे पूरी दुनिया में एक नए आयाम पर ले जाने की आवश्यकता है।"


हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस के कोषाध्यक्ष टहल रामदीन ने अपने भावपूर्ण उद्वोधन में कहा कि " हिन्दी हमारे रग-रग में है। हम हिन्दी के लिए जीते हैं और हिन्दी के लिए मरते भी हैं।"

इसके अलावा डॉ हेमराज सुंदर, डॉ मिथिलेश दीक्षित, डॉ ओंकारनाथ द्विवेदी, डॉ रमाकांत कुशवाहा, डॉ अर्चना श्रीवास्तव, श्रीमती कल्पना लाल जी ने भी विचार सभा को संबोधित किया। परिचर्चा सत्र का संचालन डॉ राम बहादुर मिश्र, कवि सम्मेलन का संचालन सागर त्रिपाठी तथा उदघाटन सत्र का संचालन धनराज शंभू और सुनीता प्रेम यादव ने किया। विषय परिवर्तन रवीन्द्र प्रभात ने किया। 

इस अवसर पर हिन्दी प्रचारिणी सभा मॉरीशस तथा परिकल्पना के द्वारा हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने हेतु संकल्पित प्रयास करने पर बल दिया गया। 

दोनों देशों के राष्ट्रगान के साथ सभा की शुरुआत हुयी तथा अंत में मॉरीशस के दिवंगत साहित्यकार स्व. अभिमन्यु अनत को श्रद्धांजलि अर्पित कर सभा का समापन हुआ।

(मॉरीशस से डॉ राम बहादुर मिश्र की रपट)

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (12-09-2018) को "क्या हो गया है" (चर्चा अंक-3092 ) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  2. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन वराह जयन्ती और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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