बंद अगर तो ढंग से बंद : व्‍यंग्‍य संग्रह


6 टिप्‍पणियां:

  1. बधाई हो...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (19-01-2014) को "सत्य कहना-सत्य मानना" (चर्चा मंच-1496) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. उत्तर
    1. 500 रुपये की प्रति पर आधा किलो मिठाई दी जा रही है।

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  3. यह पुस्‍तक भी सफल हो. शुभकामनाएं.

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  4. बधाईयाँ "शुन्यकाल" तो अभी तक नहीं मिला, अब ढंग से बंद करवाने चले हो :)

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  5. व्‍यंग्‍य का शून्‍यकाल की प्रतियां अब उपलब्‍ध नहीं है। दूसरा संस्‍करण आने पर ही मिल सकेगा।

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