बना रहता चाहता हूं विद्यार्थी चाहे न मनाया जाए विद्यार्थी दिवस (कविता)

अफवाह नहीं खबर मानो सच्ची
मुन्ना को बना रहने देना
विद्या की अर्थी
अर्थी मतलब मौन
मौन रहकर सीखता रहूं
चाहे शव जैसा दिखता रहूं।

आप सब कुछ सिखलाएं
मैं सिर्फ नफा यानी अच्छाइयों
को करूं पसंद
आप इससे होगे रजामंद
पर रजा तेज कौन होगा
जो सदा सीखने के अटूट
जज्बे से लवरेज होगा।

माना कि अच्छा नहीं हूं
विद्यार्थी
पर एक में सारी खूबियां
मत तलाशो
मुन्ना को राम नहीं
इंसान मानो
सारी आशाएं और विश्वास
मुन्‍ना पर ही मत जमा लो।

जो पिघलना चाहे
उसे जमाओ ही मत
दूध रहने दो
जो जम जाए
उसे बना लो लस्सी
चाहे उम्र हो जाए अस्सी
सीखने रहने की
तनी रहनी चाहिए रस्सी
रस्सी बने रहे रस्सी
बने सरिया
जैसा दिख रहा है
अमेरिका को
सीरिया के हाथ में
लोहे का सरिया।

इससे बहने लगा है
संघर्ष का दरिया
उसी दरिया के पानी को
बनाकर शीतल जल
सबके मन पर डालो
हरेक मन पर
आज शांति का परचम लहरा दो।

इसे अफवाह नहीं मानें
और अच्छी लगे तो लाइक
भी चटकाएं और साझा भी करें।

मुन्ना की अधिक नहीं तो
इतनी तो मानें
पर चीन को घोलकर बनाएं चीनी
पा‍क को इतना पकाएं
कि वह जला भुना नजर आए।



4 टिप्‍पणियां:

  1. उचित दिवस पर सार्थक कविता परंतु कविता की खुबी यह है कि उसमें आधुनिक संदर्भ है। चीनी और अमरिका के नीतियों और वृत्तियों का मखौल भी उडाया है।

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  2. लगे रहिये मुन्ना भाई
    कभी तो खुश दिखोगे
    बोलोगे जब आई आई
    टीचर की पूँछ हाथ
    में आज मेरे आई ! :)

    उत्तर देंहटाएं

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