लीवर लीव पर (कविता नहीं सच)



लीवर शरीर में हो या मशीन में
कैसे कैसे  सीन क्रिएट करता है
इंसान इसके बिगड़ने से डरता है
भेज देता है लीवर इंसान को
लीव पर जहां से वापसी नहीं।

मशीन का लीवर इंसान बदल लेता है  
मशीन को वह दुरुस्त कर लेता है
मशीन को लीव की जरूरत नहीं पड़ती
उसे तेल पानी पिला दो, सेवा करवा दो
फिर दोबारा से अच्छे से काम करवा लो।

मशीन का लीवर आसानी से बदला जाता है
मशीन बंद करो, लीवर आसानी से बदल लो
इंसान की देह को नहीं सकते रोक
उसमें लगाने की कोशिश में ब्रेक
शरीर ठहर जाता है
उसमें नया लीवर ठोकना
चलते इंजन में काम करना
पूरी तरह से जोखिम भरा है
शरीर रूपी इंजन फेल हो सकता है। 

जब से मालूम हुआ है मुझे
रक्‍त में विकार है
मत समझना कि मेरा खून खराब है
विकार बोले तो वायरस
तब से नसों में, शिराओं में  
जहर पिघलता महसूस हो रहा है
इंसान के मन पर हावी होती यह  
तन की अपार शक्ति का करिश्‍मा है
कितने ही चश्‍मे बदल कर देख लो

ऐसा ही सबको अपने बारे में दिखता है।  

कोई डरता है , डर डर कर मरता है
कोई मेरी तरह कविता लिखकर हंसता है। 

5 टिप्‍पणियां:

  1. जब से मालूम हुआ है मुझे
    रक्‍त में विकार है
    मत समझना कि मेरा खून खराब है
    विकार बोले तो वायरस
    तब से नसों में, शिराओं में
    जहर पिघलता महसूस हो रहा है
    इंसान के मन पर हावी होती यह
    तन की अपार शक्ति का करिश्‍मा है
    कितने ही चश्‍मे बदल कर देख लो
    all the best

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