ठेका(लघु कथा)

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  • अजमेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ थी कि वहाँ की कोई बैंच खाली नहीं थी। एक बैंच पर एक परिवार, जो पहनावे से हिन्दू लग रहा था, के साथ बुर्के में एक अधेड़ सुसभ्य महिला बैठी थी। उसने सभ्यता से पान की पीक थूक-2 कर प्लेटफार्म पर अपने आस-पास कई चित्र बना दिये थे। बहुत देर चुपचाप बैठने के बाद जब उससे चुप्पी बर्दाश्त न हुई तो उसने बगल में बैठे युवक से पूछा, "अजमेर के रहनेवाले हैँ या फिर यहाँ घूमने आये हैं?" युवक ने बताया, "जी अपने माता पिता के साथ पुष्कर में ब्रह्मा जी के मंदिर के दर्शन करने आया था।" महिला ने बुरा मुँह बनाते हुए... आगे पढ़ें...

    1 टिप्पणी:

    1. aap ka dhanya wad mahodye, is achi katha keliye.likin ek shanka hai agar dur karden to badi krupa hogi.agar eh katha ajmer ke bajaye kashi ki hoti aur muslim aurat ke bjaye hindu hoti aur hindu navjvan ke bajaye muslim navjvan hota...to? kisi par galat tarike se kathayen likh kar samaj me bigad paida na karen yadi aap ko koi sanka ho to kripya mujhse zarur sampark karen.mohsinmubin@yahoo.com aap ka shub chintak mohsin.

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