हंस में हँसे हम भी

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  • SUMIT PRATAP SINGH
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  • हंस पत्रिका के इस माह (सितम्बर,२०११) के अंक में अपनी भी लघु कथा "लाल बत्ती का खेल" प्रकाशित हुई है. आप भी इसे पढ़ कर आनंद लें.

    लाल बत्ती का खेल (लघु कथा)

    लाल बत्ती पर तोमर जी ने गाडी रोकी ही थी कि एक लगभग 15 वर्षीय बच्चा आ धमका. उसके कपडे बहुत गंदे व जगह-२ से फटे हुए थे. उसकी सूरत को देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे उसे कई दिनों से खाना नसीब न हुआ हो. तोमर जी को उस पर दया आ गयी व उन्होंने एक दस रुपये का नोट जेब से निकाला आगे पढ़ें

    4 टिप्‍पणियां:

    1. हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनायें

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    2. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ||
      बधाई ||

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    3. वंदना जी, रविकर जी, कैलाश शर्मा जी...आप सभी का आभार...

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