सत्‍य तो सत्‍य ही रहेगा : जन लोकपाल बन कर रहेगा

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • इंदिरा गांधी के दो बेटे थे
    एक को देश चलाने का शौक था
    उसने प्‍लेन चलाया और उसे गिरा दिया

    दूसरे को प्‍लेन चलाने का शौक था
    उसने देश चलाया और उसे गिरा दिया

    इसी तरह उनकी दो बहुएं थीं
    एक को जानवर पालने का शौक था
    पर वो मिनिस्‍टर बन गई

    दूसरी को मिनिस्‍टर बनाने का शौक था
    उसने सिब्‍बल, मनीष, दिग्‍िविजय वगैरह वगैरह पाल लिए ...

    साभार : अन्‍ना हमारे फेसबुक समूह में अमित कुमार

    10 टिप्‍पणियां:

    1. बिलकुल सही। एक अनपढ़ वेट्रैस थी आज वो देश चला रही है और एक पढ़ा-लिखा मुनीम उसके यहाँ छोटू का काम करता है।

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    2. शास्त्री जी रसबतिया पर आने और शामिल होने के लिए धन्यवाद । आपका दिल से स्वागत है आप जैसे विद्वान के आने से रसबतिया का मान बढ़ा है । आशा है आप अपने अनुभव का कुछ लाभ रसबतिया को भी देंगें । मेरी पोस्ट में क्या कमी रही , और क्या होना चाहिए था भाषा का प्रवाह कैसा रहा ये सब आप समय समय पर इंगित करते रहिएगा । आशा है आप रसबतिया का रस लेते रहेंगें । आपकी समीक्षा की प्रतीक्षा मुझे हर पोस्ट के बाद रहेगी ।

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    3. सत्य यही है जन लोकपाल बन के रहेगा.

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    4. वैश्या के तोते से प्रवक्ता और मिनिस्टरों की लिस्ट में से आप लालूजी को कैसे भूल गए .बेहद सटीक व्यंग्य .
      http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
      Saturday, August 27, 2011
      अन्ना हजारे ने समय को शीर्षासन करवा दिया है ,समय परास्त हुआ जन मन अन्ना विजयी .

      शनिवार, २७ अगस्त २०११
      संसद को इस पर भी विचार करना चाहिए .
      सांसद एक छोटे से भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है ,भले वह बाजू बल ,झूठ बल ,जाति- बल, छल कपट फरेब से जीत कर संसद में चले आने में कामयाब रहता है .आने को फूलन देवी जी भी संसद में आ गईं थीं .आज भी अनेक चोर उच्चके संसद में आ गएँ हैं .सविधान निर्माताओं ने सोचा नहीं होगा एक दिन पशुओं का चारा भी हजम करने वाले संसद में आ जायेंगें .और यहाँ आकर मजमा लगायेंगें ,चुटकले सुनायेंगे ,देश की नैतिक शक्ति और बल का उपहास उड़ाएंगें ।
      सवाल आज यह मुखरित है :आम आदमी का पैसा ऐसे लोगों पर क्यों अपव्य किया जाए .जो संसद में आके चुटकले सुनातें हैं .जोकर की भूमिका निभातें हैं .पान का बीड़ा मुंह में लगाके गोल गोल घुमातें हैं .भाषा को भ्रष्ट करके बोलतें हैं ।
      और अगर संसद में ऐसे जोकरों की ज़रुरत कभी कभार पड़ती है तो वह बाहर से भी बुलाये जा सकतें हैं .किराए पर पैसे देकर .उन्हें पहले तनखा और बाद में ताउम्र पेंशन देने की कहाँ ज़रुरत है .
      और अगर लचर कानूनी प्रावधानों की आड़ में आ ही गए हैं ,नैतिकता को ताक पे रखके तो संसद के स्पीकर को लालू जैसे प्राणियों को राष्ट्रीय मुद्दों पर बोलने का हक़ नहीं देना चाहिए ।
      निर्बुद्ध लालू जी को यह समझ ही नहीं आता क़ि नैतिक बल अश्व बल से,संख्या बल से ,वोटों के सिरों सेबहुत बड़ा होता है .लालू जी का दुर्भाग्य जिस जनता की अदालत में जाने की बात ,बात- बात में वह करतें हैं उसी जन अदालत का कल संसद में अपमान कर गए जिसके प्रतिनिधि आज देश की नैतिक ताकत के प्रतीक अन्ना जी हैं .
      माननीय अन्ना जी ने संसद में "जन लोक पाल "मुद्दे पर लालू के अनर्गल प्रलाप का जो करारा ज़वाब दिया है हम तो वहां तक सोच भी नहीं सकते-"लालू जी आपका काम बच्चे पैदा करना है ,आप क्या जाने ब्रह्मचर्य व्रत क्या होता है ।उसकी आंच क्या होती है .
      संसद के लिए यह विचारणीय होना चाहिए आइन्दा के लिए संसद के फ्लोर पर ऐसे जोकरों को उतारकर संसद की ठेस न लगने दी जाए .

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    5. वैश्या के तोते से प्रवक्ता और मिनिस्टरों की लिस्ट में से आप लालूजी को कैसे भूल गए .बेहद सटीक व्यंग्य .

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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