जिन हिन्‍दी ब्‍लॉगरों की पुस्‍तकें प्रकाशित हुई हैं, वे जुगाड़ भिड़ाएं

कहां भिड़ाना है जुगाड़
नभाटा की इमेज पर
करके क्लिक पढ़ लें
और
करें तद्नुसार कार्रवाई।

सजग रहना जरूरी है
तभी पुस्‍तकें बिकेंगी
सुन रहे हो
मोहल्‍लालाइव
पुस्‍तकें सिर्फ दुकानों
पर ही नहीं बिकती हैं

यहां पर भी भिड़ानी पड़ती है जुगाड़
नहीं तो इकट्ठा होता है खूब कबाड़
प्रकाशित पुस्‍तकों का।

चाहते तो बचे रहना
तो कार्रवाई जरूर करना।

आप क्‍यों हंस रहे हैं
आपकी भी तो पुस्‍तक हुई है प्रकाशित
उसको भी सबमिट करना
मेरी तरफ मत देखिए
हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग : अभिव्‍यक्ति की नई क्रांति
2011 में हुई है प्रकाशित
और राजभाषा विभाग ने मांगी हैं
2010 में छपित।

पढ़ रहे हो पंकज सुबीर
पढ़ रहे हो समीर भाई
याद दिला रहा हूं
अयन प्रकाशन को
और शैलेश भारतवासी को भी।

फिर मत कहिएगा
कि बतलाया नहीं
चेताया नहीं
सो रहे थे हम
जगाया नहीं।

6 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ समझ नही आया…………ज़रा खुलकर बताइये और नये क्या करें उनका भी जुगाड लगाइये।

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  2. सच कह रहे है आप, हिंदी पुस्तक बेचने के लिये बहुत कुछ करना होता है,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं

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