अरे दीवानों मुझे पहचानो...

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  • ravindra prabhat
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    मई-२०११ से प्रकाश्य

    पुस्तकों के साथ मैं भी आ गई. पहचान लो मैं हूँ कौन ?
    किसकी हूँ सहेली 
    बूझ सको तो बूझो मैं हूँ एक पहेली 
    मैं पत्रिका हूँ 
    हिंदी ब्लॉग जगत की नेत्रिका हूँ 
    द्रौपदी आई थी पांच पांडवों के साथ 
    मैं आई हूँ दो पुस्तकों के साथ 
    ब्लॉग पर काफी दिनों से हूँ 
    पर प्रिंट में आई हूँ अब 
    बड़ी तारीफ़ कर रहे हैं सब 
    मेरा लोकार्पण हुआ है अभी-अभी 
    अब मुझसे मिल सकते हैं आप सभी .....
    नहीं पहचाना ?
    अगर पहचान  गए हों
    तो बताएं
    अपने लबों को हिलाएं
    फिर की बोर्ड पर उंगलियाँ नचायें
    और टिपण्णी बॉक्स में
    आ जाएँ
    मुझे पाने के लिए निम्न संख्या पर
    फोन घुमाएं :
    ९४१५२७२६०८


    9 टिप्‍पणियां:

    1. आपका बहुत-बहुत स्‍वागत है .... बधाई के साथ शुभकामनाएं ।

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    2. आपकी सार्थक पहल और अनवरत साधना को नमन ......बधाई स्वीकारें

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    3. sabhi ko khoob khoob badhaai aur abhinandan !

      aayojan ki apaar safalta ke liye mangal kaamnaay6en

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    4. इतना हंगामा और शोर शराबा मचाकर आखिरकार कथित ब्लागरों ने अपनी दुकान जमा ही लीक मैं खुद इस कार्यक्रम की गवाह बनी ताकि सच देख सकूं. हिंदी ब्लोगिंग में श्रेष्ठ योगदान के लिए दिए गए पुरस्कार प्राप्त लोगों की भीड़ देखकर गदगदाये कथित माडरेटर केवल अपने चमचों को पुरस्कृत कर खुश दिखाई दिए. किसी महिला पत्रकार ने यदि प्रेस कांफ्रेंस के लिए विमंस प्रेस क्लब का हाल दिलवा दिया तो यह उनका हिंदी ब्लोगिंग में श्रेष्ठ योगदान हो गया? ‘हम तुम्हें ग़ालिब कहें, तुम हमें मीर’ की तर्ज पर भीड़ जुटाना वाकई काबिले तारीफ़ है. ऐसे व्यंगकार जो अपने ब्लॉग पर कभी सबसे बेहतर वाशिंग मशीन तलाशते नजर आते हैं तो कभी लोगों से सबसे अच्छा मोबाइल का माडल पूछते हैं, वे वर्ष के सर्वश्रेष्ठ व्यंगकार कैसे हो गए? खटीमा वालों ने कौनसा ऐसा उत्सवी लोकगीत लिख दिया कि वे सर्वश्रेष्ठ गीतकार बन गए? सकारात्मक ब्लागर में सर्वश्रेष्ठ का पुरस्कार इसलिए दिया गया कि प्राप्तकर्ता एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, और एक अखबार के संपादक भी, जिनमें सर्वश्रेष्ठ व्यंगकार के कथित व्यंग्य प्रकाशित होते रहते हैं. यदि इस पुरस्कार वितरण में पारदर्शिता बरती जाती तो कई अनाम-उत्साही ब्लोगरों का हौंसला बढ़ता, मगर खैर अभी क़यामत दूर है! सभी विजेताओं को मेरी दिली मुबारक.

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    5. बधाई एवं शुभकामनाएं

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    6. मल्लिका जी ने अपनी समझ के अनुसार ठीक ही कमेंट किया होगा!
      --
      मैं उत्सवी गीतकार नहीं हूँ, मगर मैंने सभी उत्सवों पर लिखने का असफल प्रयास अवश्य किया है!
      --
      उच्चारण ब्लॉग पर मैं अपनी तुकबन्दी लगा देता हूँ!

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    7. मल्लिका जी, क्यों उदास हैं,
      पुरुस्कार न मिलने का गम या अन्य कारण खास हैं,
      आपने अपनी प्रोफाइल क्यों छुपाई है,
      पहले की ही है या अभी अभी बनाई है,
      यूं तो आपका नाम ही पारदर्शिता का सिनोनियम है,
      लेकिन यूं छुपकर आप खुद क्यों अनोनियम हैं
      जरा सामने तो आईये
      रुख से पर्दा तो हटाईये
      यह माना कि पुरुस्कार न मिल पाने से आपको कष्ट हुआ होगा
      कोई बन्दा खुश तो कोई रुष्ट हुआ होगा
      अरे यह तो दुनिया का दस्तूर है
      हमारे हक में होने वाला फैसला ही हमें मंजूर है
      यदि आपको खराब लगा हो तो हमारी सलाह अपनाइये
      एक सम्मेलन अपने यहां करवाईये
      सभी ब्लागर्स को ससम्मान बुलाइये
      और उसमें हमें मुख्य अतिथि बनवाईये
      अगर सभी बिलागरान को प्रेम से बुलायेंगी
      उनके आतिथ्य का जिम्मा उठायेंगी
      तो सच मानिये आपको भी आनन्द आयेगा
      और पुरुस्कृत न होने का मलाल भी मिट जायेगा..

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
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