व्‍यंग्‍यकार प्रेम जनमेजय का प्रेम पत्र

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  • अविनाश वाचस्पति
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  • प्रिय/ सम्माननीय

    आपको सूचित करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है कि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की प्रतिष्ठित पत्रिका 'गगनांचल' के मानद संपादक के कार्यभार से मैं मुक्त हो गया हूं। रेत में फंसी लेखन की अपनी नाव को अब मैं पुनः खेने का प्रयत्न कर सकता हूं तथा अपने मिशन, 'व्यंग्य यात्रा' पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे हितचिंतक इस सूचना से, मेरी तरह, प्रसन्न ही होंगे।
    अपने समय के उन सभी प्रतिष्ठित सृजनधर्मियों का मैं आभारी हूं,, जिनका मुझे निरंतर रचनात्मक सहयोग मिला। एक वर्ष पूर्व मैंनें 'गगनांचल' के अपने प्रथम संपादकीय में लिखा था- कुछ परंपराएं होती है जिनका महत्व शाश्वत होता है। जो समय के हाथ लगाने से मैली नहीं होती हैं। जो अशोक के फूल की तरह उपेक्षा का दंश नहीं झेलती है। 'गगनांचल' की प्रौढ़,सुदृढ एवं सशक्त परंपरा है जो हिंदी साहित्य का ऐतिहासिक अंग बन चुकी है। समय-समय पर 'गगनांचल' ने हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे प्रसन्नता है कि मैं भी इस समृद्ध परंपरा की एक बूंद बनने के लिए इसके द्वार पर दस्तक देने आया हूं।'
    इस समृद्ध परंपरा की बूंद बनाने में निम्नलिखित रचनाकारों के रचनात्मक सहयोग के लिए मैं हृदय से कृतज्ञ हूं।( कृपया निम्नलिखित नामों में वरिष्ठता का कोई क्रम न ढूंढें)
    सर्वश्री -राजेंद्र यादव, निर्मला जैन, पी सी जोशी, कन्हैयालाल नंदन, कैलाश वाजपेयी, नरेंद्र कोहली, अमरकांत,चित्रा मुद्‌गल, रवींद्र कालिया अभिमन्यु अनत ,हिमांशु जोशी, महीप सिंह, रामदरश मिश्र, उदय प्रकाश, असगर वजाहत, विश्वनाथप्रसाद तिवारी, आलोक मेहता, रमेश उपाध्याय, ममता कालिया , सुधीश पचौरी, सूर्यबाला, संजीव, सुषम बेदी,विष्णु नागर, विश्वनाथ सचदेव, रामदरश मिश्र,पुष्पा भारती, गंगाप्रसाद विमल,रामशरण जोशी, देवेंद्र राज अंकुर, नरेंद्र मोहन, अनामिका, बलराम अशोक चक्रधर, गोपाल चतुर्वेदी, ज्ञान चतुर्वेदी, अजित कुमार, कमलकिशोर गोयनका, सूरज प्रकाश, अनिल जोशी, तेजेंद्र शर्मा, सत्येंद्र श्रीवास्तव, महेश दर्पण, ज्ञान प्रकाश, हरजेंद्र चौधरी,विनोद संदलेश, नर्मदाप्रसाद उपाध्याय, अजय नावरिया, दिविक रमेश, प्रताप सहगल, सुरेश धींगरा, पूर्णिमा वर्मन, मारिया नेज्य़ेशी, रत्नाकर पांडेय, अविनाश वाचस्पति, राधेश्याम तिवारी, प्रभाकर श्रोत्रिय, राजेश जोशी, शिवनारायण, सुरेश सेठ, कृष्णदत्त पालीवाल, सुदर्शन वसिष्ठ, राजुरकर राज, राकेश पांडेय,,वेद राही, विश्वरंजन, विष्णुचंद्र शर्मा, विनय विश्वास, पद्‌मेश गुप्ता, उषा राजे सक्सेना, हरीश नवल,, विजय, सुधा ओम ढींगरा, जयप्रकाश मानस, कादंबरी मेंहरा, दिव्या माथुर, विमलेश कांति वर्मा, बालेंदु शर्मा दाधीच,, देवशंकर नवीन, गोविंद व्यास, तरसेम गुजराल, बलदेव वंशी, रति सक्सेना, सोमदत्त शर्मा, मुन्नवर राना, पुष्पा राही, राजेंद्र उपाध्याय, रमणिका गुप्ता, राजेंद्र सहगल, वीरेंद्र प्रभाकर,,यज्ञ शर्मा, लक्ष्मीशंकर वाजपेयी, हरदयाल, विनय वर्मा, विवेक,योगेंद्र शर्मा अरुण, अशोक गुप्त,नरेश शांडिल्य, निर्मिश ठाकर, चंद्रकांता, राजकमल, प्रदीप पंडित, वेद्रप्रकाश अमिताभ, वानिना, ज्ञानरंजन, बुद्धिनाथ मिश्र, रमेश मेहता, , अजय गुप्ता, अवधेश मिश्र, मंजीत चात्रिक, शमशेर अहमद खान, मनीष वर्मा अनूप श्रीवास्तव, अकेला भाई, रत्नावली कौशिक, गिरीश पंकज, लालित्य ललित, गिरिराजशरण अग्रवाल, अरविंद मिश्र, मनोहर पुरी, शशिप्रभा तिवारी, आदि
    sadar
    Dr. Prem Janmejai
    Dr. Prem Janmejai
    # 73 Saakshara Appartments
    A- 3 Paschim Vihar, New Delhi - 110063
    Phones:(Home) 011-91-11-25264227
    (Mobile) 9811154440

    3 टिप्‍पणियां:

    1. आ गया था ईमेल में यह प्रेम पत्र. :)

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    2. आपके ब्लॉग पे आया, दिल को छु देनेवाली शब्दों का इस्तेमाल कियें हैं आप |
      बहुत ही बढ़िया पोस्ट है
      बहुत बहुत धन्यवाद|

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