मेरठ आ रहे हैं हम : कौन कौन मिलना चाहेंगे

 जी हां, आज दोपहर बाद पवन चंदन, उपदेश सक्‍सेना, मिथिलेश दुबेसुमित प्रताप सिंह, प्रतिनिधि, शोभना वेल्‍फेयर सोसायटी के साथ मेरठ के लिए  चल रहा हूं वहां पर नीशू तिवारी से मुलाकात होनी  तय है। मुझे     यहां से मालूम हुआ है कि मेरठ में अशोक प्रियरंजन, डॉ. अनुराग आर्य, हरी एस जोशी, इरशाद अली, निर्मल गुप्‍ता, प्रीति गुप्‍ता, सौरभ शर्मा, उमेश पुरी, विक्रम सिंह राघव भी हैं। निश्चित ही इस डायरेक्‍ट्री के अतिरिक्‍त भी बहुत सारे हिन्‍दी ब्‍लॉगर होंगे। जिनसे मिलना संभव हो सके, वे आज 6 जून 2010 को दोपहर बारह बजे तक मेल पर सूचित कर सकते हैं अथवा  बाद में 09868166586 पर फोन कर सकते हैं या संदेश भेज सकते हैं। भाई इरशाद अली से तो फरीदाबाद में साहित्‍य शिल्‍पी के वार्षिकोत्‍सव कार्यक्रम में पिछले वर्ष मुलाकात हुई थी। विश्‍वास है कि इस बार उनसे मेरठ में मुलाकात हो सकेगी।
इस मुलाकात का उद्देश्‍य ब्‍लॉग रूपी घर को साफ कैसे रखा जाए, जैसे मसलों पर विमर्श करना  है। जैसे  सभी अपना घर साफ रखना चाहते हैं, नहीं चाहते कि उसमें गंदगी फैलाई जाए बल्कि साफ रखने के प्रयास किए जाते हैं। दरवाजे पर आगंतुक आने पर पहचानने पर ही दरवाजा खोला जाता है। ऐसा नहीं किया जाता है कि आप घर में नहीं हैं और दरवाजा खुला छोड़कर चले जाते हों। जिससे कोई भी घर में घुसकर कुछ भी गंदगी फैला सके। जब हम घर के मामले में ऐसा करते हैं तो क्‍यों नहीं अपने ब्‍लॉग पर भी ऐसा करते। बेनामी टिप्‍पणियों के विकल्‍प को निष्क्रिय कर देते और अगर कुछ  लोग अपनी पहचान छिपाकर फर्जी नामों से टिप्‍पणियां करने में सुकून पाते हैं तो अवश्‍य ही मॉडरेशन रूपी विकल्‍प को सक्रिय करना चाहिए। ताकि कोई भी उत्‍पाती तत्‍व आकर खुराफात करने में सफल न हो सकें। ऐसी टिप्‍पणियों को अवश्‍य ही डिलीट कर दिया जाना चाहिए।
ऐसे ही और भी मुद्दों जैसे किसी की पोस्‍ट देखकर असंयमित होने से बचने इत्‍यादि पर भी विचार किया जाएगा। जैसे जिन बातों को मेल  या फोन पर आपसी बातचीत से सुलझाया जा सकता है, उनको ब्‍लॉग पर नहीं लिखा जाना चाहिए, आप मेरठ में हैं तो आप अवश्‍य ही संपर्क कीजिए। हम सबको आपसे मिलकर प्रसन्‍नता होगी।

16 टिप्‍पणियां:

  1. तो अब आपदा -उपरान्त प्रबंधन चल रहा है ! हमारी हैसियत तो बस शुभकामनाएं देने की रह गयी है -प्राप्त करें ,सद्भावना यात्रा शुभ फलदायी मंगलकारी हो !

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  2. आईये जानें .... मन क्या है!

    आचार्य जी

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  3. मिलना तो हम चाहेंगे मगर टोरंटो चले आओ तो बात बनें...:) वरना जब आयेंगे तो जहाँ कहेंगे वहाँ मिल लेंगे.

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  4. Aap ko pratham swadheenta sangram ka aarambh karne vale mahanayakon ke shahar ki yatra ke liye dheron shubhkamnayen. aajadi ki ladaai men aur khadi boli ko hindi ke roop men sthapit karne men jaise is shahar ne agrani bhumika nibhayee thi, usi tarh aap ke is abhiyan men bhi vahan ke bloglekhak sabse aage khde milenge, aisi aasha kar sakta hun.

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  5. वक्त करता जो वफ़ा, आज हम भी मेरठ में होते...

    वाकई वक्त भी कभी-कभी क्या हसीं सितम करता है...हम न हम रहते हैं...तुम न तुम रहते हैं...मेरा शहर मेरठ...मेरी सांसों में रचा-बसा...बचपन-किशोरावस्था की शरारतों मेरठ के गली-कूच वाकिफ़ है...आबू लेन पर घर है...बेगम ब्रिज और मंगल पांडे नगर में फैमिली बिज़नेस है...लेकिन देखिए आज अविनाश जी के कहने पर भी मेरठ नहीं जा पा रहा हूं...कभी प्रायर एपाइटमेंट्स भी आदमी को कितना बेबस कर देते हैं...

    जय हिंद...

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  6. अविनाश
    जीते रहो
    दादी तो नहीं आ सकती मन तो है सभी माहान ब्लोगरों के दर्शन करूं
    दूरी है मजबूरी
    पर हां आप मेरठ में बेगम ब्रिज के छोले खाना मत भूले १९५५ में खाए थे दादी अभी तक स्वाद है

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  7. गुड्डो दादी बेगम ब्रिज के जिन छोलों का ज़िक्र कर रही हैं वो राधे की मटर की चाट है...वाकई ऐसी मटर की चाट पूरी दुनिया में और कहीं नहीं मिलती...

    इसके अलावा आबू लेन के आखिर में दिल्ली वाले के छोले भटूरे, सुनील की आलू-टिक्की और लाल कुर्ती में हरिया की लस्सी भी ज़रूर ट्राई कीजिएगा...

    जय हिंद...

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  9. अविनाश जी आपकी ब्लोग इतिहास की इस एतिहासिक यात्रा के लिये शुभकामनाये पर ब्लोगिग से हुडे सभी साथियो को मेरा ये सन्देश जरूर देना कि ब्लोगर होने से पहले हम इन्सान है और मतभेद होने पर इन्सान होने की अपनी पहचान से सम्झौता ना करे. हरि शर्मा, अविनाश, नीशू, मिथ्लेश आते जाते रहेगे लेकिन काल के कपाल पर ये नही लिखा जाये कि बडे ब्लोगर बनने के लिये हमने इन्सानियत का साथ छोड दिया.
    अनन्त शुभकामनाये.
    सबसे जूनियर ब्लोगर

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  12. मेरठ से लौटने पर पढि़ए पहली पोस्‍ट झकाझक टाइम्‍स पर। http://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/2010/06/blog-post.html

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