साथी हाथ बढ़ाना साथी रे : राजेश उत्‍साही

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  • राजेश उत्‍साही
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  • दोस्तो दो दिन पहले मैंने अपने ब्लाग  गुल्‍लक  पर एक पोस्ट- अनुभव की गुल्लक में जो है उसे बांट रहा हूं- लगाई है। पर मैं यह देखकर हैरान-परेशान हूं कि ब्लाग पर पाठक आ तो रहे हैं,पर कोई उस पर टिप्पणी नहीं कर रहा। आमतौर पर औसतन दो टिप्पणी तो मेरी हर पोस्ट पर आ ही जाती हैं। मैं इस बात को लेकर चितिंत हूं कि कहीं इसमें कोई तकनीकी समस्या तो नहीं है। इसीलिए नुक्कड़ पर अपनी समस्या को रख रहा हूं। जानकार साथी मदद करेंगे,यह उम्मीद तो है ही।

    अनुभव की गुल्लक में जो है उसे बांट रहा हूं
    लिखने के दौरान मेरे जो अनुभव रहे हैं, मैंने जो सीखा है वह मैं औरों तक पहुंचाने की कोशिश करता रहा हूं। इस बात का जिक्र मैंने अपनी एक पोस्ट नसीम अख्तर की कविताओं के बहाने से में भी किया है। पिछले दिनों किसी एक ब्लाग पर मैं अपनी आदत के मुताबिक टिप्पणी करके आ गया। अगले‍ दिन यह देखकर सुखद आश्चर्य से भर उठा कि उस ब्लागर ने मेरी बात को गंभीरता से लिया था और मुझे इमेल करके अपनी कविताओं के संदर्भ में मदद मांगी थी। साथ में अपनी एक अप्रकाशित कविता भी भेजी थी। मैंने अपनी तरफ से उस कविता में आवश्यक संपादन करके उसे वापस प्रेषित कर दिया। जवाब में मुझे जो मेल मिला उसका संपादित अंश मैं यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।........ कृपया आगे पढ़ने के लिए मेरे ब्‍लाग गुल्‍लक पर आने का कष्‍ट करें। धन्‍यवाद।

    1 टिप्पणी:

    1. लो जी टिप्पणी आ गई ।
      यानि वज़ह कुछ और ही है ।
      टिप्पणियां आने में एक साल लग जाता है भाई ।
      लिखते रहो , पढ़ते रहो , टिप्पणी देते रहो ।
      फिर देखो कैसे मिलते हैं दोस्त ।

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    आपके आने के लिए धन्यवाद
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