अडवाणी युग की समाप्ति का आगाज

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    (लिमटी खरे)

    अडवाणी युग की समाप्ति का आगाज

    1980 में अस्तित्व में आई भाजपा ने अब अटल आडवाणी युग की बिदाई का आगाज कर ही दिया है। भाजपा के पितृ संगठन संघ को लगने लगा था कि अटल आडवाणी का नाम पार्टी से बडा होकर उभर रहा था, संघ काफी दिनों से इस प्रतीक्षा में था कि भाजपा के प्रतीक चिन्ह कमल के इन नेताओं के समक्ष बौने होते स्वरूप को एक बार फिर विशालकाय बनाकर समूचे दल को इसकी छत्रछाया में आकार दिया जाए। पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के समय भी इस तरह के प्रयास किए गए पर सफल नहीं हो पाए। इस बार नितिन गडकरी के पहले प्रभावी प्रदर्शन में मंच पर पहली मर्तबा अटल आडवाणी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के चित्रों के स्थान पर कमल का फूल ही दिखाई दिया, जिसे अटल आडवाणी युग के औपचारिक पूर्ण विराम के तौर पर देखा जा रहा है। पहली बार भाजपा के कार्यकर्ताओं ने किसी नेता विशेष के नारे लगाने से परहेज किया, और भाजपा ज़िन्दाबाद और भारत माता की जय के गगनभेदी नारे लगाए। इसके अलाव इस रैली में एक और महत्वपूर्ण बात उभर कर सामने आई है, वह है गडकरी का सबसे अन्त में दिया गया भाषण। अमूमन अन्त में सबसे वरिष्ठ नेता का उद्बोधन हुआ करता रहा है। यह पहला मौका था जबकि आडवाणी की उपस्थिति के बावजूद भी नितिन गडकरी ने सबसे अन्त में अपनी बात रखी। पार्टी में चल रही चर्चाओं के अनुसार अटल जी अब सक्रिय रहे नहीं और आडवाणी को उनकी मर्जी के खिलाफ ही बलात ही पाश्र्व में ढकेलने की तैयारी चल रही है।
     
    कमल नाथ का दांव रमेश चित्त

    जब देश के भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ को सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री मिली तब लोग मान रहे थे कि यह नाथ के पर कतरने के लिए उनके कद से छोटा विभाग दिया गया है, साथ ही इस मन्त्रालय से जहाजरानी को अलग कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि दस जनपथ में अपनी खासी दखल का लाभ उठाकर रमेश ने कमल नाथ के पर कतरने का प्रयास किया था। चूंकि पिछली बार नाथ वाणिज्य मन्त्री थे, तो रमेश उनके अधीन राज्य मन्त्री। अब रमेश वन एवं पर्यावरण मन्त्री जैसे महात्वपूर्ण विभाग को पाकर कमल नाथ के आगे वाली कुर्सी पर काबिज हो गए हैं। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि कमल नाथ ने अपनी राजनैतिक चाल से अब वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय को दो फाड करने का बीजारोपण कर दिया है। पीएमओ ने इसके लिए सैद्धान्तिक सहमति दे दी है। आने वाले समय में रमेश के पास या तो वन बचेगा या पर्यावरण महकमा।
     
    किसे सच माने किसे माने झूठ

    देश का दुर्भाग्य है कि नौकरशाहों के भरोसे पर चलने वाले जनसेवकों द्वारा विरोधाभासी वक्तव्यों की बौछार की जाती है, देश की जनता संशय में है कि किस वक्तव्य को वह सच माने किसे माने झूठ। मामला देश के वन एवं पर्यावरण मन्त्री जयराम रमेश के श्रीमुख से निकले वक्तव्यों का है। कुछ दिनों पूर्व जयराम रमेश ने बिना दस्ताने पहने यूनियन काबाZईड के कचरे को हाथ में उठाकर मीडिया को फोटो जारी करते हुए कहा था कि इससे कोई खतरा नहीं है। अब राज्य सभा में अपनी ही उस बात से वे पलट गए हैं। रमेश ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने भोपाल गैस त्रासदी स्थल के आसपास की जमीन, भूमीगत जल में पाए जाने वाले तत्वों का अध्ययन किया और पाया है कि वहां धातुओं, कीटनाशकों और कुछ हानिकारक जैव योगिक मौजूद हैं। अब समझ में नहीं आता कि भारत गणराज्य के वन एवं पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण ओहदे पर बैठे एक जिम्मेदार मन्त्री के भोपाल यात्रा के दौरान दिए वक्तव्य को सच माना जाए या राज्य सभा में कही बात को।
     
    मितव्ययता : मन्त्रियों का विदेश दौरा खटाई में

    पहली बार विपक्ष सरकार को पूरी तरह घेरने के मूड में दिखाई दे रहा है। इस बार विपक्ष ने कटौती के प्रस्ताव की तैयारियां आरम्भ कर दी हैं। विपक्ष की इस कवायद ने सरकार के पसीने छुडा दिए हैं। सबसे ज्यादा वे जनसेवक मन्त्री खौफजदा हैं, जिनका आधे से ज्यादा समय सरकारी दौरों के नाम पर विदेशों के सैर सपाटे में गुजरता है। विपक्ष के तीखे तेवर देखकर लगने लगा है कि कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी की साख का प्रश्न बन चुके महिला आरक्षण बिल और प्रधानमन्त्री की प्रतिष्ठा से जुडे नाभिकीय क्षतिपूर्ति उत्तरदायित्व विधेयक शायद ही इस बार परवान चढ सके। सरकार की पहली प्राथमिकता इस बार वित्त विधेयक को पास करावाने की है। कांग्रेस के मैनेजरों को निर्देश दिए गए हैं कि वित्त विधेयक के पास होते समय एक एक मन्त्री सांसद को सदन में अनिवार्य तौर पर उपस्थित रखा जाए। वजीरे आजम 28 और 29 अप्रेल को दक्षेस सम्मेलन के लिए भूटान में तो विदेश मन्त्री कृष्णा 27 को थिंपू में और मिल्लकार्जुन खडगे भी विदेश यात्रा पर रहेंगे। इसके अलावा अनेक मन्त्रियों की विदेश यात्रा के प्रस्ताव पीएमओ के पास लंबित हैं। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि जब तक वित्त विधेयक पास नहीं होता किसी भी मन्त्री को सदन से किसी भी कीमत पर गैरहाजिर नहीं रहने दिया जाएगा।
     
    रतन खत्री को पीछे छोडा मोदी ने

    देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई से चलने वाले सट्टा न केवल महाराष्ट्र को अपनी जद में लिए हुए है, वरन् आसपास के सूबों में भी इसका जोर है। इसको चलाता है रतन खत्री नामका एक शख्स। रात नौ बजे ओपन तो बारह बजे क्लोज। एक अंक अगर लग गया तो एक का नौ गुना और अगर दोनों अंक अर्थात जोडी आ गई तो सवा रूपए के सौ रूपए। है न फायदे का सौदा। अरे हुजूर सवा रूपए में सौ कण्डे भी नहीं आते हैं। आईपीएल के विवादित कमिश्नर ललित मोदी के दमाद गौरव बर्मन ने सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए हैं। आईपीएल के आधिकारिक मीडिया पार्टनर ग्लोबल क्रिकेट वेंचर्स (जीसीवी) की वेवसाईट पर सरेआम सट्टा खिलाया जा रहा है। जीसीवी की वेवसाईट क्रिकेट डाट काम पर चलने वाले सट्टे में टीमों के भाव अलग अलग तय किए जाते हैं, जो समय के साथ बदलते रहते हैं। मजे की बात यह है कि जीसीवी में ललित मोदी के दमाद गौरव बर्मन की बडी हिस्सेदारी है। अरे भई कहावत है न समरथ को नहीं दोष गोसाईं, सो मोदी और बर्मन पर कार्यवाही होने की उम्मीद करना बेमानी ही है।
     
    अब लगा न तीर कलेजे पर

    देश के गरीब गुरबे बिजली के बिना किस तरह की परेशानी झेलते हैं, इस बात का अहसास देश की सबसे बडी पंचायत में जनसेवकों को भी हुआ और उनका पसीने से हाल बेहाल हो गया। सोमवार 19 अप्रेल को संसद के चलते समय एक दर्जन से अधिक बार बिजली गोल हुई। कल तक गरमी की मार झेलने वाले आज एयर कण्डीशनर के बिना पग न धरने वाले जनसेवकों के तेवर इस दौरान देखते ही बने। यद्यपि यह कटौती सीपीडब्लूडी के बिजली स्टेशन में तकनीकि गडबडी के कारण हुई बताई जा रही है, पर गरमी में बिजली के बिना पसीने के दो चार सांसदों के हाल बेहाल हो गए। वैसे देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में बिजली की आंख मिचौली नई बात नहीं है। संसद में जब बिजली ने अपना ताण्डव दिखाया तो बिहार के सांसद के मुंह से बरबस ही निकल पडा ``अब तीर लगा कलेजे पर, अरे भई अब तो अहसास कर लो कि देश के गरीब गुरबे किस तरह बिजली के बिना परेशान होते होंगे।

    आई पी के परिणाम : विद्या पास, कुलपति फेल!

    जेसिका लाल प्रकरण में देश की सबसे बडी अदालत उधर अपना फैसला सुना रही थी, वहीं इससे महज एक किलोमीटर दूर गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में जेसिका पर ही बन रही फिल्म ``नो वन किल्ड जेसिका`` पर जबर्दस्त हंगामा हुआ। दरअसल यूनिवर्सिटी के अन्दर निदेशक राज कुमार गुप्ता और अभिनेत्री विद्या बालान शूटिंग में व्यस्त थे। यूनिवर्सिटी का दरवाजा बन्द था, और वहां तैनात थे मसल मेन। इसी बीच वहां के कुलपति आन पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद भी दरवाजा नहीं खोला गया। कुलपति प्रो.डी.के.बन्दोपाध्याय का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने अन्दर बैठे अधिकारियों से संपर्क किया तब जाकर कुलपति को अपने ही विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल सका। उधर चर्चा है कि सेंटर फार मीडिया स्टेडीज के एक कंसलटेंट ने शूटिंग के लिए पन्द्रह लाख रूपए लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को अंधेरे में रखकर इस कारनामे को अंजाम दिया है। बहरहाल जो भी हो विश्वविद्यालय के छात्र पूरे प्रसंग के बाद कुटिल मुस्कान के साथ यह कहते जरूर नज़र आए कि आईपी यूनिवर्सिटी का रिजल्ट आ गया। विद्या बालान पास और प्रो.डी.के.बन्दोपाध्याय फेल।
     
    रेल में पानी नहीं था तो कौन सा पहाडा टूट गया!

    देश के एक जिम्मेदार मन्त्री कमल नाथ कहते हैं कि देश के लोग ज्यादा खाने लगे हैं सो मंहगाई बढ रही है, मंहगी चीनी पर शरद पंवार कहते हैं कि ज्यादा चीनी खाने से शुगर हो जाती है, और अब रेल मन्त्री ममता बनर्जी ने भी इसी परंपरा को आगे बढाते हुए कह दिया कि रेल में अगर पानी नहीं था तो कौन सा पहाड टूट पडा है। मामला राज्यसभा में माकपा की वृन्दा करात ने उठाया कि विकलांग दिल्ली प्रदर्शन करने आ रहे थे, इसके लिए उन्होंने 17 लाख रूपए में विशेष रेलगाडी बुक की थी। इस गाडी में शौचालयों में पानी तक नहीं था, और वह 12 घंटे विलंब से पहुंची, इसके बावजूद भी ममता बनर्जी महादुरन्तो चलाने की बात करती हैं। वृन्दा के आरोप से बोखलाकर ममता बनर्जी तैश में आ गईं और बोली अगर रेल में पानी नहीं था तो कौन सी आफत आ गई। अरे कोई तो ममता दीदी को समझाए कि जब कोई पैसा देकर किसी चीज को लेता है तो वह उपभोक्ता हो जाता है और उपभोक्ता को पूरा सन्तोष देना किसी ओर का नहीं सेवा प्रदाता का ही काम है। अगर विकलांगों ने उपभोक्ता फोरम का सहारा ले लिया तो लेने के देने भी पड सकते हैं ममता दी।
     
    मैं तो पीकर टुल्ली हो गया यारां

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सरमायादार प्रफुल्ल पटेल के अधीन काम करने वाले ड्राईवर और ट्रक चालकों के बीच अब कोई समानता नहीं रह गई है। ट्रक चलाने वाले भी दारू के नशे में टुन्न होकर गाडी चलाते हैं और आसमान में हवाई जहाज उडाने वाले पायलट भी नियम कायदों को ताक पर रखकर दारू में टुल्ली होकर हवाई यात्रियों की जान जोखम में डालने से नहीं चूक रहे हैं। जी हां यह बात झूठ नहीं है, संचालक नागर विमानन (डीजीसीए) ने पिछले साल विभिन्न एयर लाईंस के 42 पायलट्स को नशे में टुन्न होकर विमान उडाते पाया। सूचना के अधिकार कानून के तहत यह जानकारी सामने आई है। यद्यपि डीजीसीए ने एयरलाईंस के नामों का खुलासा नहीं किया है, पर यह गम्भीर चूक की श्रेणी में ही आता है। सावधानी घटी दुघZटना घटी का जुमला सडक, रेल, पानी या आकाश मार्ग से यात्रा करने पर चालकों के लिए ही लागू होता है। वैसे एयरक्रफ्ट नियम 24 के अनुसार उडान के 12 घंटे पहले क्रू के सदस्यों के लिए मद्यपान प्रतिबंधित है। और एसा करते पाए जाने पर न्यूनतम चार सप्ताह के लिए ग्राउण्डेड कर दिया जाता है।

    प्रियंका से क्या पे्ररणा ली नलिनी ने

    राजीव गांधी की हत्या के समय चर्चा में आई नलिनी धीरे धीरे चर्चाओं से गायब हो गई थी। वह एक बार फिर चर्चा में तब आई जब कांग्रेस की नज़रों में देश की युवरानी प्रियंका वढेरा उससे मिलने जेल में गई। प्रियंका किस उद्देश्य से वहां गई थी, यह बात तो वे ही जाने पर कांग्रेस के मीडिया मैनेजरों ने इस बात को खासी पब्लिसिटी दिला दी। फिर एक बार राजीव गांधी की हत्या के आरोप में उमर केद काट रही नलिनी वेल्लूर की उच्च सुरक्षा वाली जेल में गुमनामी में खो गई। हाल ही में वह एक बार फिर चर्चा में आ गई है, उच्च सुरक्षा वाली जेल की अभैद्य सुरक्षा में सेंध लग गई है। नियमित जांच के दौरान नलिनी के पास एक मोबाईल मिला है, जिससे उसने विदेशों में काल किया है। अब वह मोबाईल उसके पास प्रियंका की मुलाकात के पहले ही था या उसके बाद में आया यह प्रश्न शोध का विषय है। लोग तो यहां तक कहने से नहीं चूक रहे हैं कि प्रियंका ही उससे मिलने गई थी, दोनों सखियां बन गई होंगी सो अब नलिनी अपनी सखी प्रियंका वढेरा से ही बतियाती होगी।
     
    नितीश का अंग्रेजी प्रेम

    बिहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार और ब्रितानी हुकूमतकर्ताओं में क्या सामनता है। दोनों में कम से कम एक समानता तो है कि ब्रितानी अपनी मातृभाषा अंग्रेजी को बहुत प्यार करते हैं और नितीश को भी अंग्रेजी से बेहद लगाव है। यकीन नहीं होता न। जनाब मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ब्लागर बन गए हैं। वे भी ब्लाग लिखने या लिखवाने लगे हैं। नितीशस्पीक्स डाट ब्लागस्पाट डाट काम पर िक्लक करिए और बिहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार से रूबरू होईए। हिन्दुस्तान में ब्लाग बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश के अनेक ब्लागरों के प्रयास से आज इंटरनेट पर हिन्दी खासी न केवल लोकप्रिय हुई है वरन् हिन्दी को अहम स्थान भी मिल चुका है। आज देश में हिन्दी में लिखने वालों ब्लागर्स की तादाद लाख की तीन दहाई तक पहुंच गई है। इस सबके बाद लोगों को अफसोस यह जानकर होगा कि नितीश ने अपना ब्लाग सिर्फ और सिर्फ एलीट क्लास के लिए बनाया है, मतलब साफ है कि यह आंग्ल भाषा में है। बिहार के गरीब गुरबे क्या इसे पढ पाएंगे इस पर संशय ही है।
     
    सांसदों का विदेशी वस्तु प्रेम

    महात्मा गांधी जिन्होंने आधी लंगोटी पहनकर देश को ब्रितानियों से मुक्त कराया और स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया, क्या आप यकीन कर सकते हैं कि उसी गांधी के देश में आज के जनसेवक सांसद विदेशी वस्तुओं से प्रेम जताने से नहीं चूक रहे हैं। जी हां यह सच है, एक सैकडा से अधिक सांसदों ने विदेशी हथियारों को खरीदकर जता दिया है कि उन्हें देश में बने हथियारों पर कितना यकीन है। सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी में यह बात उभरकर सामने आई है। पिछले दस सालों में अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर जनसेवकों ने विदेशी हथियारों को जमकर खरीदा। केद्रीय मन्त्री जयप्रकाश जायस्वाल, जनार्दन द्विवेदी, विनोद खन्ना, परनीत कौर, योगानन्द शास्त्री, अबू आसिम आजमी आदि सहित एक सौ से अधिक सांसदों ने विदशी हथियारों पर इत्तेफाक जताया है। दरअसल विदेशों से अवैध तरीके से लाए जाने वाले हथियारों की जप्ती कर राजस्व खुफिया महानिदेशालय, सीमा शुल्क और पुलिस आदि द्वारा इन हथियारों को केवल सरकारी उपयोग के लिए अथवा वित्त मन्त्रालय की स्वीकृति के उपरान्त इनकी नीलामी की जाती है। मजे की बात यह है कि औने पौने दामों में मिलने वाले इन हथियारों को खरीदने के पहले सांसद को इस बात को लिखित तौर पर देना होता है कि उनके पास खरीदी के समय कोई हथियार नहीं है।
     
    क्या गौमांस अवैध है हिन्दुस्तान में!

    गाय हमारी माता है, गाय की रक्षा के लिए राजनैतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जब तब बयानबाजी की जाती है, पर लगता है दिल्ली सरकार इससे इत्तेफाक नहीं रखती है। कामन वेल्थ गेम्स के दौरान अतिथियों को गोमांस परोसे जाने को लेकर पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा में जमकर रार हुई। शीला दीक्षित सरकार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गेम्स के दौरान आने वाले विदेशी महमानों को गोमांस परोसे जाने की सहमति गुपचुप तरीके से दे दी है। विपक्ष का तर्क था कि जब दिल्ली में गोमांस रखने और परोसने तक पर पाबन्दी है तब दिल्ली के मुख्य सचिव कैसे इसकी अनुमति दे सकते हैं। पहले भी गेम्स के दौरान गो मांस परोसे जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में काफी हद तक जद्दोजहद हो चुकी है।

    पुच्छल तारा

    देश में निर्वतमान विदेश राज्य मन्त्री शशि थुरूर और आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के आईपीएल को लेकर हुए विवाद की धूम मची हुई है। हर जगह आईपीएल आईपीएल का ही शोर नज़र आ रहा है। एसी परिस्थियों पर सटीक व्यंग्य करते हुए रायपुर से एन.के.श्रीवास्तव ने ईमेल भेजा है कि देश कह रहा है गरीबी रेखा के नीचे अर्थात बीपीएल बीपीएल, पर नेता हैं कि मानते ही नहीं वे चिल्ला रहे हैं आईपीएल, आईपीएल। गांधी तेरा देश महान।

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