मित्र मेरे जो पढ़ते हैं मेरा लिखा
मेरी रचना का कहते हैं स्वाद चखा
न जाने कैसे टिप्पणी तो कर जाते हैं
चाहे टिप्पणी हो कैसी भी पर वे मेरे
तो मन को खूब भाते हैं
, शिकायत :
पर पसंद पर चटका लगाना भूल जाते हैं ?
पसंद चटकाने से रचना का मजा हो जाता है दूना
जितनी पसंद चटकती हैं आनंद बढ़ता है कई गुना।
एक नए ब्लॉगर का शिकायतनामा है। जिसको भावों में मैंने बांध दिया है। इतना गूढ़ संदेश खुले शब्दों में उतार दिया है।
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मेरी रचना का कहते हैं स्वाद चखा
न जाने कैसे टिप्पणी तो कर जाते हैं
चाहे टिप्पणी हो कैसी भी पर वे मेरे
तो मन को खूब भाते हैं
, शिकायत :
पर पसंद पर चटका लगाना भूल जाते हैं ?
पसंद चटकाने से रचना का मजा हो जाता है दूना
जितनी पसंद चटकती हैं आनंद बढ़ता है कई गुना।
एक नए ब्लॉगर का शिकायतनामा है। जिसको भावों में मैंने बांध दिया है। इतना गूढ़ संदेश खुले शब्दों में उतार दिया है।


