Posted on
  • by
  • vandana gupta
  • in
  • अब यहाँ भी आ गये हैं
    http://readerblogs.navbharatti​mes.indiatimes.com/zindagiekkh​amoshsafar/entry/%E0%A4%AC-%E0​%A4%A8-%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%​A4%B9%E0%A4%B2-%E0%A4%9C-%E0%A​4%95-%E0%A4%95%E0%A4%AC-%E0%A4​%A8-%E0%A4%AE-%E0%A4%AE-%E0%A4​%B2-%E0%A4%B9
    readerblogs.navbharattimes.ind​iatimes.com
    चलो अच्छा हुआ अब दहलीज को लांघकर निकल जाते हैं लोग वरना आस के पंख कब तक इंतजार की धडकनें गिनते यूँ भी अब कहाँ लोग बनाते हैं दहलीज घरों में ये तो कुछ वक्त के निशाँ हैं जिन्हें दहलीजें समेटे बैठी हैं वरना दहलीजें तो अब सिर्फ उम्र की हुआ करती हैं रिश्तों की नहीं ........... शायद तभी रिश्तों की द

    1 टिप्पणी:

    आपके आने के लिए धन्यवाद
    लिखें सदा बेबाकी से है फरियाद

     
    Copyright (c) 2009-2012. नुक्कड़ All Rights Reserved | Managed by: Shah Nawaz