हिंदी के वयोवृद्ध लेखक एवं पत्रकार सुशील कुमार का शुक्रवार को दिल का दौरा पडने से निधन हो गया। वह 73 वर्ष के थे।
1935 में इलाहाबाद में जन्मे कुमार हिंदी रीडर्स डाइजेस्ट पत्रिका सर्वोत्तम के संपादक थे। उन्होंने महाभारत के स्त्री पात्रों कुंती, पांचाली, गंधारी, देवकी, सत्यवती, रुक्मिणी पर छह खण्डों में उपन्यास लिखा था। इसके अलावा उन्होंने कर्ण पर भी दो खण्डों में उपन्यास लिखा था। उन्हें इस उपन्यास पर हिंदी अकादमी का सर्वश्रेष्ठ कृति पुरस्कार भी मिला था। कुमार इन दिनों कौटिल्य पर एक उपन्यास लिख रहे थे। उनके परिवार में पत्नी के अलावा तीन पुत्र तथा चार पुत्रियां हैं।
मेरी झूठी जिंदगी की सच्चाई...
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Respected papa,
मेल लिखते हुए अच्छा तो नहीं लग रहा पर मेरे लिए जरूरी था... आपको भी मालूम है
मैं अपनी कोई भी बात आज तक सीधे तरीके से नहीं कह पाया बस यही तरी...
2 घंटे पहले





4 टिप्पणियाँ:
सुशील जी के निधन पर खेद ह लेकिन आज ही यह पता चला कि रीडर्स डाइजेस्ट हिंदी में भी आती ह या थी।
दिल्ली में संघर्ष के शुरुआती दिनों में सुशील जी ने काफी सहारा दिया था। नियमित अनुवाद का काम देते रहते थे। आज उनके निधन की खबर पढ़कर उनका स्नेह याद आ गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे।
महंगी होने के कारण सर्वोत्तम के पुराने अंक दरियागंज के साप्ताहिक पटरी बाज़ार से ख़रीद कर पढ़ता था. अच्छे संपादक की निगरानी में होने के कारण शायद ज़्यादा अच्छी लगती थी पत्रिका.
ईश्वर, सुशील जी की आत्मा को शांति दे.
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